पापा मैंने लिखी कविता
पापा मैंने लिखी कविता
सुनो! सुनो! तुम मेरी कविता
मेरी कविता में नहीं है परियां
न इसमें कोई, बाग और बगिया
गुड्डे- गुड़िया खेल नहीं है
छुक-छुक भागती रेल नहीं है
ना पर्वत, ना नदी-समंदर
न ही कहीं कोई भालू-बंदर
इसमें रित्विक, सलमान, कटरीना
आमीर, अक्षय, साहिद,करीना
इसमें चाकलेट, पीज़ा, बर्गर,
पैटी, आइसक्रीम खाओ जमकर
इसमें स्कूल है, बस है, स्टैंड है
बस पढने में ही, पूरा दिन एंड है
पापा मैंने लिखी कविता
सुनो! सुनो! तुम मेरी कविता
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uttam.
ReplyDeleteबदलते वक्त का परिदृश्य प्रस्तुत करती है ये कविता.. बधाई.
ReplyDeleteबच्चों की दुनिया के बदलाव को कविता में खूबसूरती से कहने के लिये शुक्रिया !
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