Saturday, February 4, 2012

पूर्णिमा वर्मन की बाल कविताएं


बालबाड़ी में आज प्रस्तुत है अभिव्यक्ति व अनुभूति की संपादक पूर्णिमा वर्मन की बाल-कविताएं। पूर्णिमा वर्मन का नाम वेब पर लिखने-पढनेवालों के लिए नया नहीं है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि कहानी,कविता,साहित्यिक निबंध ,हास्यव्यंग्य सभी में लेखन करने वाली पूर्णमा जी ने बाल साहित्य में भी महत्त्वपूर्ण काम किया है। बच्चों के लिए लिखी उनकी कविताओं को पढते हुए लगता है कि उन्होंने बालमन को बहुत ही कोमलता और गहराई से पढा है। उनकी इन कविताओं में बालमन व स्वर मुखरित होता हुआ दिखायी देता है। एक विशेष बात कि उन्होंने इन कविताओं में बच्चों के लिए लेखन को नानी-दादी-परी-राजकुमारी-दानव-भूतप्रेत के तिलिस्म से बाहर निकालने का महत्त्वपूर्ण व सार्थक प्रयास किया है। जंगल के पशु-पक्षियों


पूर्णिमा वर्मन (जन्म २७ जून, १९५५, पीलीभीत , उत्तर प्रदेश), वेब-पत्रिका अभिव्यक्ति[1] और अनुभूति[2] की सम्पादिका है। पत्रकार के रूप में अपना कार्यजीवन प्रारंभ करने वाली पूर्णिमा का नाम वेब पर हिंदी की स्थापना करने वालों में अग्रगण्य है। उन्होंने प्रवासी तथा विदेशी हिंदी लेखकों को प्रकाशित करने तथा अभिव्यक्ति में उन्हें एक साझा मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण काम किया है। माइक्रोसॉफ़्ट का यूनिकोडित हिंदी फॉण्ट आने से बहुत पहले हर्ष कुमार द्वारा निर्मित सुशा फॉण्ट द्वारा उनकी जाल पत्रिकाएँ अभिव्यक्ति तथा अनुभूति अंतर्जाल पर प्रतिष्ठित होकर लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी थीं।
वेब पर हिंदी को लोकप्रिय बनाने के अपने प्रयत्नों के लिए उन्हें २००६ में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, साहित्य अकादमी तथा अक्षरम के संयुक्त अलंकरण अक्षरम प्रवासी मीडिया सम्मान[3], २००८ में रायपुर छत्तीसगढ़ की संस्था सृजन सम्मान द्वारा हिंदी गौरव सम्मान[4], दिल्ली की संस्था जयजयवंती द्वारा जयजयवंती सम्मान तथा केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के पद्मभूषण डॉ॰ मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार [5]से विभूषित किया जा चुका है।[6] उनका एक कविता संग्रह "वक्त के साथ" नाम से प्रकाशित हुआ है।[7] संप्रति शारजाह, संयुक्त अरब इमारात में निवास करने वाली पूर्णिमा वर्मन हिंदी के अंतर्राष्ट्रीय विकास के अनेक कार्यों से जुड़ी होने के साथ साथ हिंदी विकिपीडिया के प्रबंधकों में से भी एक हैं।

पूर्णिमा वर्मन की बाल कविताएं

1.चाय गरम

सर्दी का आया मौसम
चुहिया ने पी चाय गरम
पीकर तन में गरमी आई
घंटाघर तक दौड़ लगाई

2.बाघ

बदन सुनहरा धारीदार
लंबे दाँत नज़र खूँखार
बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु
ताक़त का जैसे अवतार

3. भूरा भालू

भूरा भालू झबरे बाल
मस्ती भरी निराली चाल
देखो डाल गले में आया
धारी वाला लाल रुमाल

4. भेड़िया

सब पशुओं के दंगल में
चला भेड़िया जंगल में
जंगल में मंगल था छाया
सबने मिलकर शोर मचाया
बेचारा इतना घबराया
छुप कर सोया कंबल में

5. बड़ा सा गैंडा

बड़ा सा गैंडा धीमी चाल
नाक पे सींघ और मोटी खाल
शाकाहारी भोजन खाता
कभी किसी को नहीं सताता

6. हिरन

एक हिरन का बच्चा पाया
मैंने उसको दोस्त बनाया
ना हम अटके ना हम भटके
घूमा सब जंगल बेखटके

7. शेर

जंगल जंगल डोले शेर
बहुत बड़ा मुँह खोले शेर
मैं हू सब पशुओं का राजा
बड़ी ज़ोर से बोले शेर

8. वनमानुष

छोटे पैर और लंबे हाथ
दो पैरों पर तन को साध
चलता है मानुष के जैसा
देखो यह वनमानुष कैसा

9. याक

करने चले हिमालय सैर
उठा न बोझा याक बगैर
सजा धजा एक याक मंगाया
फिर मौसम का मज़ा उठाया

10. हाथी

चिड़ियाघर में हाथी था
सब बच्चों का साथी था
पंखे जैसे कान बड़े
सूँड़ हिलाता खड़े खड़े

लंबी कविताएँ

1. टोपी

हर फोटो में आती टोपी
हर मौसम में भाती टोपी
घनी धूप में हमें बचाती
सर्द में है गरमाती
रंग रंग की रूप रूप की
दुनिया को भरमाती टोपी
गरमी में तिनकों की जाली
सरदी में वो फुँदनों वाली
खेल जन्मदिन घर और बाहर
सभी जगह सज जाती टोपी

2. नन्हीं चिड़िया

नन्हीं चिड़िया नीचे आ
नीचे आ कर गीत सुना
बड़ी धूप है आसमान में
थोड़ा सा तो ले सुस्ता
पेड़ तले ठंडी साया है
साया में आ दाना खा
पंखों को थोड़ा आराम दे
मेरी गोदी में सो जा

3. नए साल की बात

नए साल की बात करें
गए साल को माफ करें

अब न रहें कोई झगड़े
दूध पियें और हों तगड़े
कमरे का सारा कचरा
आओ मिल कर साफ करें

खुली धूप से मन निखरें
दोस्त बनें हम, ना बिखरें
जो कुछ अच्छा कर पाए
आओ मिल कर याद करें

4. तारा टूटा

दूर कहीं एक तारा टूटा
क्या जाने वो किसने लूटा
छत पर कहीं नहीं था भाई
नहीं सड़क पर पड़ा दिखाई
काश कहीं अगर मिल जाता
अलमारी में उसे सजाता
जगमग जगमग करता रहता
सुबह शाम मैं देखा करता

5. तितली

बाग बगीचा सुन्दर फूल
बैठी तितली जग को भूल
लगी झूलने फूलों के संग
ठंडी हवा बही अनुकूल
याद नहीं पर तितली को था
फूलों में है एक बबूल
खेल खेल में चुभा बबूल
तितली गयी पहाड़ा भूल

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