Thursday, September 29, 2011

चिड़िया रानी

मित्रों! बालबाड़ी का प्रथम पुष्प प्रस्तुत है

अरुण मिश्र ,अध्यापक,अर्थशास्त्र में परास्नातक ,पठन-पाठन में
रूचि,यदा-कदा कविता-लेखन ! वामपंथी विचारधारा के प्रति आस्था रखते हैं
उनके ही शब्दों में"एक व्यक्ति से अधिक स्वयं को समूची मानव परंपरा मानता हूँ ! मेरा जन्म
प्रथम मानव के साथ हुआ ! बच्चे इसी मानव परंपरा की अगली कड़ी हैं ! वे
मेरा अगला और संशोधित संसकरण है ! मैं इनमें जिंदा रहूँगा ! पुनर्जन्म और
अमरता का मेरे समक्ष यही अर्थ है !"


चिड़िया रानी

आज किधर से सूरज निकला आज किधर की हवा चली ,
चिड़िया रानी कहाँ रहीं थीं बहुत दिनों के बाद मिलीं !

पहले तो घर के आँगन में खूब धमाल मचाती थीं ,
दाना चुगती,तिनके चुनती अपना नीड़ बनाती थीं !

फिर क्या हुआ अचानक तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया ,
हमसे रिश्ता तोड़ के बोलो किनसे रिश्ता जोड़ लिया !

चिड़िया बोली ,"बिटिया रानी ऐसी कोई बात नहीं ,
प्यार करूँ औ' निभा न पाऊँ ऐसी मेरी जात नहीं !

सारे पेड़ कट गए फिर बोलो कैसे रह पाती मैं ,
कैसे रैन-बसेरा करती किस पर नीड़ बनाती मैं !

दूर घने जंगल में रहने निकल गई मैं क्या करती,
आखिर कुछ तो जीने का जरिया करती या फिर मरती !

तुमसे बिछड़ कर दुःख मुझे भी हुआ बहुत पर जाने दो
सुना है तुमने अबके बरस सोंचा है पेड़ लगाने को ?

अरुण मिश्र
४७९,विजयलक्ष्मी नगर ,सीतापुर-२६१००१.
मो.९४१५६५६३९०

3 comments:

  1. बच्चों पर अरुण जी !की कविताओं से पहली बार रूबरू हुआ ,
    बहुत सुन्दर कविता आभार ...

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  2. तुमसे बिछड़ कर दुःख मुझे भी हुआ बहुत पर जाने दो
    सुना है तुमने अबके बरस सोंचा है पेड़ लगाने को ?
    sundar!

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  3. वाह सर,बहुत खूबसूरत।मनमोहक।

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